झाँसी की रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान | Jhansi Ki Rani - Subhadra Kumari Chauhan

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने...

नर हो न निराश करो मन को - मैथलीशरण गुप्त | Nar Ho Na Nirash Karo Man Ko - Maithilisharan Gupt

A man in tension नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें यह व्यर्थ न...

हिमालय - सोहनलाल द्विवेदी | Himalaya - Sohanlal Dwivedi (प्रेणादायक कविता)

युग युग से है अपने पथ पर  देखो कैसा खड़ा हिमालय!  डिगता कभी न अपने प्रण से  रहता प्रण पर अड़ा हिमालय!  जो जो भी बाधायें आईं  उन सब से ही लड़...

आज तिरंगा फहराता है - संजीवन मयंक (देशभक्ति कविता)

आज तिरंगा फहराता है, अपनी पूरी शान से । हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।। आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी। लाखों लोगों ने प्र...

बसंती हवा - केदारनाथ अग्रवाल | Basanti Hawa - Kedarnath Agrwal

हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ। सुनो बात मेरी - अनोखी हवा हूँ। बड़ी बावली हूँ, बड़ी मस्त्मौला। नहीं कुछ फिकर है, बड़ी ही निडर हूँ। जिधर चाहती ह...

15 अगस्त की पुकार - अटलबिहारी वाजपेयी | 15 August ki pukar - Atal bihari Vajpayee

पंद्रह अगस्त का दिन कहता -- आज़ादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है, रावी की शपथ न पूरी है।। जिनकी लाशों पर पग धर कर आज़ादी भारत में आई। व...

हमारे कृषक - रामधारी सिंह दिनकर | Our Farmers - Ramdhari Singh Dinkar

छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है  मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है  वसन कहाँ? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नह...
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