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हमारे कृषक - रामधारी सिंह दिनकर | Our Farmers - Ramdhari Singh Dinkar

छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है  मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है  वसन कहाँ? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नह...
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