हमारे कृषक - रामधारी सिंह दिनकर | Our Farmers - Ramdhari Singh Dinkar
छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है वसन कहाँ? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नह...
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May 12, 2018
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