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सब ग्रह गाते, पृथ्वी रोती - हरिवंशराय बच्चन | Sab Grah Gate, Prithvi Rotee - Harivansh Rai Bachchan

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता,  poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। सब ग्रह गाते, पृथ्वी रोती। ग्रह-ग्रह पर लहरात...

प्रकृति से सीखो - श्रीनाथ सिंह | Prakriti Se Sikho - Shrinath Singh

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता, poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। प्रकृति से सीखो फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों...

नदी को बोलने दो - राकेशधर द्विवेदी | Nadi Ko Bolne Do - Rakesh dhar Dwivedi

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता,  poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। नदी | River नदी को बोलने दो, शब्द स्वरों के ख...

हिमालय - सोहनलाल द्विवेदी | Himalaya - Sohanlal Dwivedi (प्रेणादायक कविता)

युग युग से है अपने पथ पर  देखो कैसा खड़ा हिमालय!  डिगता कभी न अपने प्रण से  रहता प्रण पर अड़ा हिमालय!  जो जो भी बाधायें आईं  उन सब से ही लड़...

बसंती हवा - केदारनाथ अग्रवाल | Basanti Hawa - Kedarnath Agrwal

हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ। सुनो बात मेरी - अनोखी हवा हूँ। बड़ी बावली हूँ, बड़ी मस्त्मौला। नहीं कुछ फिकर है, बड़ी ही निडर हूँ। जिधर चाहती ह...
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